Varanasi: विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर काशी के नागेपुर गांव में बुनकरों और दिहाड़ी मजदूरों की आवाज जोरदार तरीके से गूंजी। सैकड़ों की संख्या में जुटे मजदूरों ने पारंपरिक बुनकरी उद्योग को बचाने, रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करने और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
गांव (Varanasi) में निकली रैली के बाद अम्बेडकर पार्क में एक सभा आयोजित की गई, जहां मजदूरों और बुनकरों ने खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखीं। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती महंगाई और घटते रोजगार के चलते बुनकर समुदाय आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पारंपरिक बुनकरी उद्योग लगातार कमजोर हो रहा है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका खतरे में है।
सभा में मौजूद बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने बिजली आपूर्ति, बिलिंग और कनेक्शन से जुड़ी समस्याएं भी प्रमुखता से उठाईं। अधिकारियों ने सभी शिकायतों (Varanasi) को गंभीरता से सुनते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
Varanasi: ‘बुनकरों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं’
रामधीरज भाई, जो सर्व सेवा संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और वरिष्ठ गांधीवादी समाजसेवी हैं, ने कहा कि बुनकरों और मजदूरों (Varanasi) के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि बुनकरी उद्योग को बचाने के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं और मजदूरों को सम्मानजनक पारिश्रमिक दिया जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अरविंद मूर्ति (भारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच – आईकन) ने मजदूरों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका संगठन है। वहीं मुहम्मद अकरम ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगों पर कार्रवाई (Varanasi) नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान बुनकर प्रकोष्ठ सलाहकार शैलेश, संतोष बीडीसी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे। सभा के अंत में सभी मजदूरों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की और सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की।

