एक हफ्ते में दूसरी बार महंगा हुआ Petrol-Diesel, बढ़ती कीमतों से आम आदमी पर बढ़ा बोझ

देशभर में महंगाई से जूझ रही जनता को पेट्रोल और डीजल (Petrol-Diesel) की कीमतों में फिर बढ़ोतरी का झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी।

महज एक सप्ताह के भीतर ईंधन कीमतों में यह दूसरी वृद्धि है। इससे पहले तीन दिन पहले ही पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने परिवहन से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगाई बढ़ने की आशंका को और मजबूत कर दिया है।

दिल्ली में पेट्रोल 98 रुपये के पार

नई दिल्ली में पिछली बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। अब नई वृद्धि के बाद राजधानी में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। लगातार बढ़ते दामों ने निजी वाहन चालकों (Petrol-Diesel) के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई पर भी दबाव बढ़ा दिया है।

Petrol-Diesel: महानगरों में भी बढ़े ईंधन के दाम

मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.08 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत 109.70 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई, जबकि डीजल 96.07 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल 104.49 रुपये और डीजल 96.11 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों (Petrol-Diesel) में उछाल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है।

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। हालांकि युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

तेल कंपनियों का घाटा कम, राहत नहीं

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार पिछली बढ़ोतरी के बाद सरकारी तेल कंपनियों का घाटा कुछ कम हुआ है। हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से किसी राहत पैकेज या सब्सिडी की संभावना नहीं जताई गई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संकेत दिए हैं कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रही हैं।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel) में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और कृषि लागत बढ़ती है, जिसका असर फल-सब्जियों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों के सामान तक दिखाई देता है।

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