Varanasi में दवा व्यापारियों की हड़ताल, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ बंद रहीं 6000 दुकानें

अखिल भारतीय रसायनज्ञ एवं औषधि विक्रेता संगठन के आह्वान पर देशव्यापी बंद के तहत Varanasi में भी दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। इस बंदी का समर्थन वाराणसी दवा विक्रेता समिति ने किया, जिसके चलते शहर की थोक और रिटेल मिलाकर करीब 6000 दवा दुकानें बंद रहीं। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखा गया।

लंका चौराहे से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन

दवा व्यापारियों (Varanasi) ने सुबह लंका चौराहे से अभियान की शुरुआत की। इस दौरान व्यापारियों ने बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी की और शहरभर में दुकानों को बंद कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ऑनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक दवा कारोबार प्रभावित हो रहा है और इससे मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

“ऑनलाइन कंपनियां नियमों का फायदा उठा रहीं”

दवा विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि व्यापारी अपने भविष्य और व्यवसाय की सुरक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में आए GSR 17(E) नियम के जरिए ऑनलाइन कंपनियों को हर जिले में फार्मेसी स्टोर खोलने की अनुमति दी जानी थी, लेकिन विरोध के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में लागू GSR 220(E) 2020 के तहत होम डिलीवरी की अनुमति मिलने के बाद ऑनलाइन कंपनियों ने बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाया। आरोप लगाया गया कि कई प्लेटफॉर्म पर नारकोटिक्स, NRx और शेड्यूल दवाओं की बिक्री बिना पर्याप्त निगरानी के हो रही है।

Varanasi: भारी डिस्काउंट पर भी उठाए सवाल

दवा व्यापारियों (Varanasi) का कहना है कि दवाओं की कीमत और मार्जिन सरकार तथा राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण द्वारा तय किए जाते हैं, इसके बावजूद ऑनलाइन कंपनियां जरूरत से ज्यादा छूट दे रही हैं। व्यापारियों ने आशंका जताई कि इसके पीछे फर्जी दवाओं और अवैध नेटवर्क का खतरा हो सकता है।

एआईओसीडी ने जताई चिंता

अखिल भारतीय रसायनज्ञ एवं औषधि विक्रेता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेएस शिंदे के अनुसार बिना मजबूत रेगुलेशन के ऑनलाइन दवा बिक्री तेजी से बढ़ रही है। उनका कहना है कि इससे पारंपरिक केमिस्टों के रोजगार पर संकट पैदा हो रहा है और बिना डॉक्टर के पर्चे गंभीर दवाओं की बिक्री से दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ रही है।

दवा व्यापारियों की प्रमुख मांगें

दवा विक्रेताओं(Varanasi) ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

  1. GSR 817 अधिसूचना को रद्द किया जाए
  2. ई-फार्मेसी के लिए सख्त और स्पष्ट नियामक व्यवस्था लागू की जाए
  3. महामारी के दौरान लागू GSR 220 अधिसूचना को भी वापस लिया जाए

व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों (Varanasi) पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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