BHU में एमए इतिहास की सेमेस्टर परीक्षा में पूछे गए “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” से जुड़े प्रश्न को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार को एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और इसे वैचारिक रूप से प्रेरित प्रश्न बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
बताया जा रहा है कि सोशल साइंस फैकल्टी के इतिहास विभाग (BHU) द्वारा आयोजित एमए इतिहास चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में छात्रों से पूछा गया था— “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस तरह ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?” परीक्षा समाप्त होने के बाद यह प्रश्न सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इतिहास विभाग पहुंचकर विभागाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिषद का आरोप है कि विश्वविद्यालयों (BHU) में अकादमिक विमर्श की आड़ में एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन ने कहा कि इस तरह के प्रश्न छात्रों पर एक खास वैचारिक दृष्टिकोण थोपने का प्रयास प्रतीत होते हैं, जो शिक्षा की मूल भावना के खिलाफ है।
कार्यकर्ताओं ने BHU प्रशासन पर उठाये सवाल
एबीवीपी बीएचयू (BHU) इकाई के अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि BHU जैसी प्रतिष्ठित संस्था में इस प्रकार के प्रश्न पूछना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और निष्पक्ष चिंतन का केंद्र होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा के प्रचार का माध्यम। वहीं इकाई सहमंत्री विकास कुमार ने आरोप लगाया कि इस तरह के प्रश्न छात्रों के बीच वैचारिक भ्रम और सामाजिक विभाजन पैदा कर सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और चेतावनी दी कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। परिषद ने मांग की कि भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण के दौरान अकादमिक संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
अजय राय ने भी दी अपनी प्रतिक्रिया
इस बीच अजय राय ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों (BHU) को नफरत और विभाजन की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के खिलाफ दुर्भावना पैदा करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं हो सकता। अजय राय ने आरोप लगाया कि शिक्षा संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है और इतिहास व समाजशास्त्र जैसे विषयों को एक खास दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज भारतीय ज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और किसी भी समुदाय को संदेह के घेरे में खड़ा करने की मानसिकता समाज के लिए उचित नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से विवादित प्रश्न को वापस लेने और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति से बचने की मांग की।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन (BHU) की ओर से अब तक इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कैंपस में छात्र संगठनों, शिक्षकों और शोधार्थियों के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

