Varanasi की दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दालमंडी क्षेत्र में प्रस्तावित भवन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है और विवादित संपत्ति पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है।
क्या है मामला?
यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अलिमुन्निशा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका में नगर निगम द्वारा 26 मई 2026 को उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और अंतिम आदेश की विधिवत तामील के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जा रही थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक विवादित भवन (Varanasi) पर यथास्थिति बनी रहे। 26 मई 2026 के नोटिस के आधार पर कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई न की जाए। राज्य सरकार और संबंधित विभाग अपना जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी।
Varanasi: याचिकाकर्ता की प्रमुख दलीलें
याचिकाकर्ता ने कहा कि:
- उनके भवन को जर्जर घोषित किया गया है, लेकिन आपत्तियों पर अंतिम आदेश नहीं दिया गया।
- संयुक्त समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर कार्रवाई की जा रही है, जबकि कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
- बिना अंतिम आदेश की विधिवत सेवा के भवन गिराना अवैध और असंवैधानिक होगा।
परियोजना पर क्या असर पड़ेगा?
दालमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना (Varanasi) के तहत पहले से कई भवनों के अधिग्रहण और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। हाल के दिनों में प्रशासन द्वारा पोकलैंड मशीनों की मदद से कई भवन गिराए भी गए थे। हालांकि हाईकोर्ट का यह आदेश केवल याचिका से संबंधित विवादित संपत्ति पर लागू माना जा रहा है। व्यापक परियोजना पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आगामी सुनवाई और अदालत के आगे के आदेशों पर निर्भर करेगा।
प्रभावित लोगों के लिए राहत
इस आदेश को दालमंडी क्षेत्र (Varanasi) के उन भवन स्वामियों और व्यापारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो चौड़ीकरण योजना के दायरे में आ रहे हैं। अब राज्य सरकार, नगर निगम और अन्य पक्षों को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय होगा।
दालमंडी परियोजना काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र और आसपास के मार्गों (Varanasi) को सुगम बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ पुनर्वास, मुआवजा और ध्वस्तीकरण प्रक्रिया को लेकर लगातार कानूनी एवं सामाजिक बहस भी जारी है।

