Varanasi: 1 मई का दिन जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘श्रमिक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, वहीं आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह दिन बेहद विशेष माना जाता है। इसी दिन बाबा सिद्धार्थ गौतम राम का अवतरण दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सामाजिक सरोकारों की अनूठी मिसाल भी देखने को मिली, जहां 55 जरूरतमंद कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया।
अवतरण दिवस के अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु, साधक, महात्मा और आमजन क्रीं-कुण्ड (Varanasi) पहुंचे। पूरा परिसर भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर नजर आया। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए सहयोग और सेवा का भी प्रतीक बना।
अघोर परंपरा के सान्निध्य में संपन्न हुआ विवाह
अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम (Varanasi) का नेतृत्व स्वयं अघोराचार्य ने किया। सैकड़ों स्वयंसेवकों की मौजूदगी में और वर-वधू के अभिभावकों की उपस्थिति में सभी वैवाहिक रस्में विधि-विधान के साथ संपन्न हुईं।
30 अप्रैल से ही वर-वधू और उनके परिजनों का आगमन शुरू हो गया था। 1 मई की सुबह आरती और पूजन के बाद हल्दी की रस्म पूरी की गई। इसके बाद शाम को भव्य मंच पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
Varanasi: 55 किलो लड्डू का प्रसाद
अवतरण दिवस (Varanasi) के मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत संध्याकालीन आरती के बाद हुई। इस दौरान 55 किलो लड्डू को केक के रूप में सजाकर अघोराचार्य के स्पर्श के बाद प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। पूरे परिसर में “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे।
देर रात तक चला विवाह समारोह
भव्य मंच पर एक साथ 55 जोड़ों का विवाह सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। सभी रस्में लोकाचार और वैदिक विधियों के साथ पूरी की गईं। विवाह समारोह देर रात तक चलता रहा, जिसमें हर जोड़े को आशीर्वाद के साथ उपहार और सहयोग राशि भी प्रदान की गई।
अंत में अघोराचार्य ने सभी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखी जीवन की कामना की। इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद भी उसका अहम हिस्सा है। इस अवसर पर बाबा प्रियदर्शी राम, बाबा कर्मवीर राम, बाबा छबीले राम और अरुण गिरी जी महाराज सहित कई प्रमुख संत और महात्मा (Varanasi) मौजूद रहे।

