Varanasi में प्रधानमंत्री की ओर से सोना न खरीदने की अपील के विरोध में स्वर्णकार समाज ने जिला मुख्यालय पर अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। शुभम सेठ “गोलू” के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्वर्णकारों, सर्राफा व्यापारियों और कारीगरों ने हाथों में आभूषण बनाने के औजारों की जगह झालमूरी के डिब्बे लेकर प्रतीकात्मक रूप से झालमूरी बेची और अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार गिरते स्वर्ण व्यापार, ग्राहकों की कम होती संख्या और बाजार में मंदी के चलते हजारों कारीगर परिवार (Varanasi) आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के बयानों और नीतियों का सीधा असर स्वर्ण कारोबार पर पड़ रहा है, जिससे पारंपरिक स्वर्णकारी कला और उससे जुड़े लोगों का भविष्य खतरे में है।
Varanasi: लाखों परिवारों की आजीविका का आधार
प्रदर्शन के दौरान शुभम सेठ “गोलू” ने कहा कि स्वर्ण व्यापार केवल कारोबार नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कारीगरों (Varanasi) को अपना पुश्तैनी काम छोड़कर दूसरे छोटे-मोटे रोजगार अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
जिला मुख्यालय (Varanasi) पर लगाए गए इस अनोखे प्रदर्शन में लोगों ने भी उत्साह दिखाया और झालमूरी खरीदकर स्वर्णकार समाज के समर्थन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि स्वर्ण व्यवसाय को प्रभावित करने वाले बयानों और नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए तथा इस उद्योग से जुड़े लाखों परिवारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में सूरज दयाल सेठ, किशन सेठ, मुकुंद सेठ, सुनीति सिंह, राज सेठ, विशाल सेठ, चेतन सोनी, विष्णु दयाल सेठ, सुजीत सेठ, संदीप सेठ, सुभाष सेठ और सुरेंद्र सेठ सहित बड़ी संख्या में सर्राफा व्यापारी, कारीगर और समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन अपने अनोखे तरीके के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

