Varanasi: आस्था और परंपरा का अनूठा संगम, डॉक्टरों के बाद अब भगवान जगन्नाथ के काढ़े पर बढ़ा भरोसा, अस्पतालों से प्रसाद लेने पहुंचे मरीजों के परिजन

Varanasi: जब चिकित्सा के साथ-साथ लोग ईश्वर की कृपा की भी कामना करते हैं, तो आस्था उन्हें मंदिरों तक खींच लाती है। काशी में इन दिनों ऐसा ही भावनात्मक और अनूठा दृश्य देखने को मिल रहा है। अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए लगाए जा रहे औषधीय काढ़े के प्रसाद के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। अब केवल स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन भी अपने प्रियजनों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना लेकर मंदिर पहुंच रहे हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा इन दिनों अनवसर काल में विश्राम कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु इसे भगवान का प्रसाद और आशीर्वाद मानकर श्रद्धापूर्वक ग्रहण कर रहे हैं।

Varanasi: अस्पतालों से भी मंदिर पहुंच रहे लोग

गुरुवार को मंदिर (Varanasi) में आस्था की कई भावुक तस्वीरें देखने को मिलीं। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती बिहार के आरा निवासी एक मरीज के परिजन भगवान का काढ़ा प्रसाद लेने पहुंचे। वहीं मंडलीय अस्पताल में भर्ती लोहटिया क्षेत्र के एक मरीज के परिजनों ने भी मंदिर में दर्शन कर काढ़े का प्रसाद ग्रहण किया और मरीज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की।

मंदिर प्रशासन (Varanasi) के अनुसार अब चंदौली, गाजीपुर, भदोही, जौनपुर समेत आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु विशेष रूप से इस प्रसाद को लेने पहुंच रहे हैं।

मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का लगभग 16 घंटे तक महाअभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इसके बाद तीनों विग्रह अस्वस्थ हो जाते हैं और स्वास्थ्य लाभ के लिए एकांतवास में विश्राम करते हैं।

इसी अवधि में उन्हें प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जाता है। इस वर्ष 14 जुलाई तक यह परंपरा जारी रहेगी। इसके बाद 16 जुलाई से काशी की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा (Varanasi) का शुभारंभ होगा।

प्रधान पुजारी ने बताया कि प्रतिदिन दोपहर करीब तीन बजे पारंपरिक विधि से लकड़ी के चूल्हे पर लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, काली मिर्च सहित कई औषधीय जड़ी-बूटियों से काढ़ा तैयार किया जाता है। विधि-विधान से भगवान को भोग अर्पित करने के बाद शाम चार बजे से इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। देर रात तक बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण करने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

Varanasi: आस्था के साथ बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या

समाजसेवी रामयश मिश्र का कहना है कि भगवान जगन्नाथ (Varanasi) के औषधीय काढ़े के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है। श्रद्धालु इसे केवल प्रसाद नहीं, बल्कि भगवान के आशीर्वाद का प्रतीक मानते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंच रहे हैं।

अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में अनवसर काल के दौरान औषधीय काढ़े का भोग लगाने और उसे प्रसाद के रूप में वितरित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। इन दिनों यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और उम्मीद का प्रतीक बन गई है। अपने परिजनों (Varanasi) के स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर अस्पतालों से मंदिर पहुंच रहे लोगों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि चिकित्सा के साथ-साथ ईश्वर में विश्वास भी लोगों को मानसिक संबल प्रदान करता है।

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