सावन से पहले Kashi में रुद्राक्ष का बाजार गुलजार, नेपाल और इंडोनेशिया से आई विशेष खेप, 30 करोड़ से अधिक का होगा कारोबार

भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास के आगमन में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इसी को देखते हुए धर्मनगरी Kashi पूरी तरह शिवमय होने लगी है। जहां एक ओर मंदिरों में विशेष तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर शहर का रुद्राक्ष बाजार भी पूरी तरह सज चुका है। देशभर से आने वाले शिवभक्तों की भारी आमद को देखते हुए वाराणसी के प्रमुख बाजारों में करीब तीन करोड़ रुद्राक्ष पहुंच चुके हैं। व्यापारियों का अनुमान है कि इस बार सावन के दौरान रुद्राक्ष और उससे जुड़े उत्पादों का कारोबार 30 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है।

प्रमुख बाजारों में बढ़ी रौनक

गोदौलिया, विश्वनाथ गली, चौक, मैदागिन, दशाश्वमेध और गोलघर जैसे प्रमुख बाजारों (Kashi) में रुद्राक्ष की दुकानों पर इन दिनों विशेष चहल-पहल देखने को मिल रही है। व्यापारियों ने कई महीने पहले ही नेपाल और इंडोनेशिया से बड़ी मात्रा में रुद्राक्ष मंगाने की तैयारी शुरू कर दी थी, ताकि सावन में बढ़ने वाली मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

दशाश्वमेध क्षेत्र की कारोबारी अंजली जायसवाल बताती हैं कि इस बार बाजार में हर वर्ग के श्रद्धालुओं के लिए रुद्राक्ष उपलब्ध हैं। सामान्य श्रद्धालु 100 रुपये से अपनी खरीदारी शुरू कर सकते हैं, जबकि दुर्लभ और विशेष मुखी रुद्राक्ष की कीमत एक लाख रुपये तक पहुंच रही है।

उन्होंने बताया कि बाजार में एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक के रुद्राक्ष उपलब्ध हैं। नेपाल से आने वाले रुद्राक्ष अपनी प्राकृतिक बनावट, स्पष्ट धारियों और धार्मिक महत्व के कारण अधिक पसंद किए जाते हैं, जबकि कम बजट वाले श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार की कंठी, माला और अन्य धार्मिक सामग्री भी उपलब्ध है।

नेपाल और इंडोनेशिया से Kashi आई विशेष खेप

चौखंभा (Kashi) की कारोबारी रश्मि सेठ के अनुसार इस वर्ष नेपाल और इंडोनेशिया से बड़ी मात्रा में रुद्राक्ष वाराणसी पहुंचे हैं। नेपाल के रुद्राक्ष अपने बड़े आकार, गहरी धारियों और धार्मिक महत्व के कारण विशेष माने जाते हैं, जबकि इंडोनेशिया से आने वाले छोटे और चिकने रुद्राक्ष कंठी माला, कंगन और धार्मिक आभूषण बनाने में सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं। इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है।

गोलघर के व्यापारी सुमित जायसवाल बताते हैं कि सावन के दौरान सबसे ज्यादा खरीदारी गोदौलिया, विश्वनाथ गली, चौक, मैदागिन और दशाश्वमेध क्षेत्र (Kashi) में होती है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु रुद्राक्ष खरीदना शुभ मानते हैं, जिसके कारण इन बाजारों में हर साल कारोबार कई गुना बढ़ जाता है।

शिवालयों में होगा रुद्राक्ष का विशेष श्रृंगार

इस बार सावन में रुद्राक्ष केवल श्रद्धालुओं की खरीदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि काशी के प्रमुख शिवालयों में भी इसका विशेष महत्व रहेगा। काशी विश्वनाथ मंदिर, महामृत्युंजय मंदिर, सारंगनाथ महादेव, केदारेश्वर महादेव समेत कई प्रमुख मंदिरों (Kashi) में भगवान शिव का भव्य रुद्राक्ष श्रृंगार किया जाएगा। विभिन्न धार्मिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ तथा अष्टभैरव मंदिरों में सवा लाख से लेकर 11 लाख रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित करने के लिए पहले से ही बुकिंग करा दी है।

बाबा कालभैरव के दरबार में भी होगी खास सजावट

कालभैरव मंदिर के महंत मोहित योगेश्वर ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार को बाबा कालभैरव के गर्भगृह और पूरे मंदिर परिसर को रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया जाएगा। यह विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा और इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

व्यापारियों का मानना है कि सावन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के काशी (Kashi) आने से केवल रुद्राक्ष बाजार ही नहीं, बल्कि पूजा सामग्री, धार्मिक वस्तुओं, होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी बड़ा लाभ मिलेगा। शिवभक्ति के इस पावन महीने में काशी एक बार फिर आस्था, आध्यात्मिकता और धार्मिक व्यापार के अद्भुत संगम का केंद्र बनने जा रही है।

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