वाराणसी: कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ सोमवार को वाराणसी की विशेष अदालत में सुनवाई होनी है। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुर्वेद विक्रम सिंह ने राहुल को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का समन जारी किया है। अगर वे आज कोर्ट नहीं पहुंचते तो अदालत आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। पिछली सुनवाई में भी राहुल अनुपस्थित रहे थे, जिससे मामला टल गया था।
मामले की जड़ अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में राहुल के एक भाषण में है, जहां उन्होंने भगवान राम को ‘पौराणिक’ और उस युग की कहानियों को ‘काल्पनिक’ बताया था। स्थानीय वकील हरिशंकर पांडेय ने इस पर आपत्ति जताते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने राहुल को ‘राम द्रोही’ बताते हुए कहा कि इस बयान से हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंची है। पांडेय ने आरोप लगाया कि राहुल और कांग्रेस पार्टी सनातन धर्म के प्रतीकों पर लगातार हमला कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
12 मई 2025 को हरिशंकर पांडेय ने वाराणसी की एमपी-एमएलए अदालत में परिवाद दायर किया था। उन्होंने दावा किया कि 21 अप्रैल 2025 को राहुल अमेरिका के बोस्टन में ब्राउन यूनिवर्सिटी के छात्रों से बातचीत में भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे। अदालत ने पहले इस याचिका को खारिज कर दिया था, लेकिन 26 सितंबर 2025 को पांडेय ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। अब आज इसी पर बहस होगी—पहले याचिका की मान्यता पर, फिर राहुल के खिलाफ केस चलाने पर फैसला।
राहुल के भाषण में उन्होंने हिंदू राष्ट्रवाद पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भाजपा का दृष्टिकोण नफरत फैलाने वाला है, जबकि भारत के महान विचारक जैसे बुद्ध, गुरु नानक, गांधी और अंबेडकर क्षमाशील और सहिष्णु थे। लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि राम को काल्पनिक कहना धार्मिक भावनाओं का अपमान है।

