देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और UPI के माध्यम से हो रहे फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। आरबीआई ने UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए 5 नए सेफ्टी फीचर्स का प्रस्ताव रखा है। हालांकि ये नियम अभी लागू नहीं हुए हैं, लेकिन जल्द ही इन पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2025 में लाखों डिजिटल फ्रॉड के मामले सामने आए, जिनमें बड़ी रकम की ठगी हुई। खास बात यह रही कि ज्यादातर फ्रॉड 10 हजार रुपये से अधिक की रकम से जुड़े थे। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक अब सुरक्षा बढ़ाने पर फोकस कर रहा है।
क्या हैं UPI के लिए 5 बड़े सेफ्टी प्लान?
1. ‘किल स्विच’ फीचर
अगर किसी यूजर को धोखाधड़ी का शक होता है, तो वह एक क्लिक में अपने सभी डिजिटल पेमेंट मोड—UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड—को तुरंत बंद कर सकेगा। इससे फ्रॉड को तुरंत रोका जा सकेगा।
2. 10 हजार से ऊपर पेमेंट पर 1 घंटे की देरी
अब 10,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन (UPI) पर एक घंटे का ‘कूलिंग पीरियड’ रहेगा। इस दौरान पैसा अकाउंट से कट जाएगा, लेकिन बैंक के पास ही रहेगा। यदि यूजर को गलती या फ्रॉड का शक हो, तो वह ट्रांजैक्शन को रद्द कर सकता है।
3. वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ सिस्टम
70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए बड़े ट्रांजैक्शन में एक भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी जरूरी हो सकती है। इससे सोशल इंजीनियरिंग फ्रॉड कम होंगे।
4. म्यूल अकाउंट्स पर सख्ती
फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए सालाना क्रेडिट लिमिट तय की जा सकती है। अचानक ज्यादा रकम आने पर पैसा ‘शैडो मोड’ में रखा जाएगा, जिसे सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकेगा।
5. OTP से आगे बढ़ेगी सुरक्षा
अब सिर्फ OTP पर निर्भरता कम होगी। बड़े ट्रांजैक्शन के लिए बायोमेट्रिक, पिन या सिक्योरिटी टोकन जैसे अतिरिक्त सुरक्षा स्तर लागू किए जा सकते हैं।
इन नए नियमों से डिजिटल पेमेंट थोड़ा धीमा जरूर हो सकता है, लेकिन सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। खासकर बड़े ट्रांजैक्शन (UPI) में फ्रॉड की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। आरबीआई ने इन प्रस्तावों पर 8 मई 2026 तक आम जनता से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद फाइनल गाइडलाइंस जारी होने की उम्मीद है।

