वाराणसी स्थित BHU के ट्रॉमा सेंटर में कथित गलत सर्जरी से मरीज की मौत के बाद छात्रों का आक्रोश बढ़ गया है। सोमवार को दर्जनों छात्र विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस पहुंचे और कुलपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
BHU: 71 वर्षीय महिला की मौत का मामला
छात्र नेता मृत्युंजय तिवारी आजाद द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 27 अप्रैल 2026 को 71 वर्षीय राधिका देवी की कथित गलत सर्जरी (BHU) के कारण मृत्यु हो गई। छात्रों का कहना है कि यह घटना प्रशासनिक और पर्यवेक्षीय लापरवाही का परिणाम है, जिसमें मरीज की पहचान की प्रक्रिया पूरी तरह विफल रही।
ज्ञापन में बताया गया कि पहले ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन से पहले मरीजों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्री-ऑपरेटिव कक्ष मौजूद थे। आरोप है कि इन्हें प्रशासनिक निर्णय के तहत हटा दिया गया, जिससे मरीजों (BHU) को बिना उचित सत्यापन के सीधे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जाने लगा। छात्रों के अनुसार, इसी कारण एक मरीज को गलत विभाग में ले जाकर सर्जरी कर दी गई।
प्रोफेसर इंचार्ज की जवाबदेही तय करने की मांग
छात्रों ने वर्ष 2022 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि ट्रॉमा सेंटर की सभी इकाइयां प्रोफेसर इंचार्ज (BHU) के नियंत्रण में होती हैं। वर्तमान में यह जिम्मेदारी प्रो. सौरभ सिंह के पास है, इसलिए इस पूरे प्रकरण में उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
छात्रों ने कुलपति (BHU) से मांग की है कि प्रोफेसर इंचार्ज को तत्काल पद से हटाया जाए, मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत पहचान और प्री-ऑपरेटिव सत्यापन प्रणाली लागू करने की भी मांग की गई है।
इस घटना को लेकर विश्वविद्यालय परिसर (BHU) के साथ-साथ आम लोगों में भी गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन द्वारा जल्द ही जांच प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

