New Delhi: ‘जरूरत और चाहत’ के संतुलन पर मंथन, राज्यपाल मनोज सिन्हा और स्वामी चिदानंद सरस्वती ने रखे अपने विचार, जुटीं देश की प्रमुख हस्तियां

New Delhi: डॉ. शंकर दयाल सिंह व्याख्यानमाला के अंतर्गत आयोजित विशेष कार्यक्रम में ‘हमारी आवश्यकताएँ और इच्छाएँ’ विषय पर व्यापक चर्चा हुई। नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस भव्य आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा, आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंद सरस्वती, पूर्व सांसद गिरिजा पाण्डेय, राजेश सिंह तथा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. रश्मि सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में राजेश सिंह ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि व्याख्यानमाला का उद्देश्य डॉ. शंकर दयाल सिंह के विचारों और मूल्यों (New Delhi) को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

New Delhi: वास्तविक सुख संतोष और आत्मिक शांति में निहित

मुख्य वक्ता स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक जीवन में जरूरत और चाहत के बीच का अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और संतुलित जीवनशैली (New Delhi) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वास्तविक सुख संतोष और आत्मिक शांति में निहित है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों और अनुभवों के माध्यम से बताया कि अनियंत्रित इच्छाएं व्यक्ति को असंतोष की ओर ले जाती हैं, जबकि संयम और संतुलन जीवन को सार्थक बनाते हैं।

कार्यक्रम (New Delhi) के मुख्य अतिथि मनोज सिन्हा ने अपने संबोधन में डॉ. शंकर दयाल सिंह को एक प्रखर साहित्यकार, चिंतक और राष्ट्रवादी व्यक्तित्व बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने अपने लेखन और सार्वजनिक जीवन में सदैव सत्य, नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन किया। उन्होंने जीवन में जागरूकता, आत्मानुशासन और संतुलन को सफलता का आधार बताया।

विवेकपूर्ण जीवन ही देता है वास्तविक संतुष्टि

राज्यपाल ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि इच्छाओं का विस्तार असीमित है, लेकिन विवेकपूर्ण जीवन ही व्यक्ति को वास्तविक संतुष्टि प्रदान कर सकता है।

इस अवसर (New Delhi) पर वक्ताओं ने डॉ. शंकर दयाल सिंह के जीवन और योगदान को भी याद किया। बिहार के औरंगाबाद जिले के भवानीपुर गांव में जन्मे डॉ. सिंह ने साहित्य, पत्रकारिता और राजनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे हिंदी भाषा के सशक्त समर्थक, संवेदनशील लेखक और जनहित के प्रति समर्पित जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते रहे हैं।

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय सिंह, अखिलेश प्रताप सिंह, दिनेश सिंह, संतोष भारतीय, संजय पासवान, किरण चोपड़ा तथा प्रसार भारती के अध्यक्ष समेत अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। अंत में डॉ. रश्मि सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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