फ्लैट खरीदने से पहले कारपेट एरिया जरूर देखें: UP रेरा की घर खरीददारों को महत्वपूर्ण सलाह

घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए उत्तर प्रदेश (UP) भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। रेरा ने स्पष्ट किया है कि किसी भी फ्लैट या अपार्टमेंट की खरीद करते समय कारपेट एरिया को ही आधार बनाना चाहिए, क्योंकि यही उस संपत्ति का वास्तविक और उपयोग योग्य क्षेत्र दर्शाता है। प्राधिकरण का कहना है कि इससे घर खरीददारों को सही जानकारी मिलेगी और वे किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार से बच सकेंगे।

UP रेरा के अनुसार रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के उद्देश्य से यह पहल की गई है। प्राधिकरण ने कहा है कि फ्लैट खरीदते समय केवल विज्ञापित क्षेत्रफल पर भरोसा करने के बजाय खरीदारों को कारपेट एरिया की जानकारी की जांच अवश्य करनी चाहिए।

कारपेट एरिया ही है कानूनी मानक

रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत अपार्टमेंट की बिक्री और उससे संबंधित जानकारी देने के लिए कारपेट एरिया को ही मानक आधार माना गया है। अधिनियम की धारा 4(2)(h) के अनुसार किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में बिक्री के लिए उपलब्ध फ्लैटों की संख्या, प्रकार और उनके कारपेट एरिया का विवरण प्रमोटर को यूपी रेरा पोर्टल पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

इसके साथ ही बालकनी, बरामदा और विशेष खुली छत (टेरेस) जैसे अतिरिक्त हिस्सों के क्षेत्रफल की जानकारी भी अलग से देनी होती है। UP रेरा ने स्पष्ट किया है कि कानून के तहत सुपर बिल्ट-अप एरिया की जानकारी देना अनिवार्य नहीं है और न ही फ्लैट की बिक्री का आधार इसे बनाया जा सकता है।

क्या होता है कारपेट एरिया?

कारपेट एरिया वह वास्तविक क्षेत्र होता है जिसका उपयोग फ्लैट का मालिक अपने रहने और दैनिक गतिविधियों के लिए कर सकता है। सरल शब्दों में कहें तो यह फ्लैट के अंदर उपलब्ध उपयोग योग्य स्थान का माप है। यही कारण है कि कारपेट एरिया किसी भी आवासीय इकाई के वास्तविक आकार को समझने का सबसे सटीक पैमाना माना जाता है।

सुपर बिल्ट-अप एरिया क्यों बनता है भ्रम का कारण?

UP रेरा ने कहा कि कई बार बिल्डर और डेवलपर फ्लैटों का प्रचार-प्रसार सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर करते हैं। इसमें फ्लैट के अलावा कॉरिडोर, सीढ़ियां, लिफ्ट क्षेत्र, लॉबी, क्लब हाउस और अन्य साझा सुविधाओं का आनुपातिक हिस्सा भी जोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया को आमतौर पर “लोडिंग” कहा जाता है। इसके कारण विज्ञापित क्षेत्रफल वास्तविक रहने योग्य क्षेत्र से काफी अधिक दिखाई देता है।

नतीजतन कई घर खरीददार यह समझ नहीं पाते कि जिस क्षेत्रफल के लिए वे भुगतान कर रहे हैं, उसमें से वास्तव में उनके उपयोग के लिए कितना स्थान उपलब्ध होगा।

सही तुलना और बेहतर निवेश में मिलेगी मदद

UP रेरा का मानना है कि यदि खरीदार विभिन्न परियोजनाओं की तुलना कारपेट एरिया के आधार पर करेंगे तो उन्हें वास्तविक मूल्यांकन करने में आसानी होगी। इससे वे यह समझ सकेंगे कि किस परियोजना में उन्हें अपने निवेश के बदले अधिक उपयोगी स्थान मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कारपेट एरिया को आधार बनाने से न केवल खरीद प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है, बल्कि उपभोक्ताओं को सूचित और बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलती है।

यूपी रेरा पोर्टल पर करें जानकारी की जांच

प्राधिकरण ने घर खरीददारों को सलाह दी है कि किसी भी संपत्ति का सौदा अंतिम रूप देने से पहले UP रेरा के आधिकारिक पोर्टल का अवश्य अवलोकन करें। पोर्टल पर परियोजना से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध होती है, जिसमें अपार्टमेंट का कारपेट एरिया, परियोजना की स्थिति, प्रमोटर का विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज शामिल होते हैं। खरीदार इस जानकारी के आधार पर फ्लैट के वास्तविक आकार और परियोजना की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से जांच कर सकते हैं।

उपभोक्ता हितों के लिए प्रतिबद्ध है UP रेरा

UP रेरा ने कहा है कि वह रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्राधिकरण भविष्य में भी घर खरीददारों को जागरूक करने और उन्हें सुरक्षित निवेश के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में विभिन्न पहल करता रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि घर खरीदना जीवन के सबसे बड़े निवेशों में से एक होता है। ऐसे में कारपेट एरिया को समझकर और रेरा पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करके खरीदार न केवल बेहतर निर्णय ले सकते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाले विवादों और भ्रम से भी बच सकते हैं।

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