Varanasi-फूलपुर थाना क्षेत्र के करखियांव स्थित गेल (GAIL) के पाइप स्टोरेज यार्ड में शुक्रवार रात भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी विकराल थी कि करीब 40 फीट ऊंची लपटें दो किलोमीटर दूर से दिखाई दे रही थीं। यार्ड के ठीक पास सीएनजी स्टेशन होने के कारण बड़े विस्फोट और भारी नुकसान की आशंका से लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि दमकल कर्मियों की तत्परता से आग को सीएनजी स्टेशन तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया गया और संभावित बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार रात करीब 9:10 बजे सीएनजी पंप (varanasi) के पीछे बने गोदाम में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। देखते ही देखते आग ने गोदाम से निकलकर यार्ड में रखी बड़ी संख्या में प्लास्टिक पाइपों को अपनी चपेट में ले लिया। ये पाइप गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए रखे गए थे और प्लास्टिक होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई।
Varanasi: 11 दमकल गाड़ियों ने चार घंटे तक किया संघर्ष
घटना (varanasi) की सूचना मिलते ही फूलपुर फायर स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आग की भयावहता को देखते हुए वाराणसी के भेलूपुर, चेतगंज, कोतवाली समेत जौनपुर से भी दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं। कुल 11 फायर टेंडर आग बुझाने में लगाए गए। पानी खत्म होने पर दमकल वाहन पास स्थित एक बिस्कुट फैक्ट्री से लगातार पानी भरकर लाते रहे। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रात लगभग एक बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
आग की ऊंची लपटों और घने धुएं को देखते हुए एहतियात के तौर पर वाराणसी-जौनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-56) की एक लेन पर यातायात रोक दिया गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को खाली कराया, जबकि प्रशासनिक अधिकारी (varanasi) भी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करते रहे। आग की लपटें देखकर आसपास के गांवों और एग्रो पार्क की औद्योगिक इकाइयों में भी हड़कंप मच गया।
20 हजार लीटर सीएनजी सुरक्षित
मुख्य अग्निशमन अधिकारी आनंद सिंह राजपूत ने बताया कि आग सीएनजी स्टेशन (varanasi) के पीछे स्थित पाइप स्टोरेज यार्ड में लगी थी। प्लास्टिक पाइपों में आग लगने के कारण उसे बुझाने में काफी समय लगा, लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि आग को सीएनजी स्टेशन तक नहीं पहुंचने दिया गया। स्टेशन परिसर में करीब 20 हजार लीटर सीएनजी मौजूद थी, जिसे सुरक्षित बचा लिया गया।
यार्ड प्रभारी गुड्डू सिंह के अनुसार यार्ड की चारदीवारी के बाहर पड़े कूड़े में आग लगी थी, जो तेज हवा के कारण यार्ड (varanasi) तक पहुंच गई। उन्होंने बताया कि यार्ड में लगभग एक करोड़ रुपये मूल्य की प्लास्टिक पाइपें रखी हुई थीं, जिन्हें भारी नुकसान हुआ है।
हाइड्रेंट नहीं होने से बढ़ी मुश्किल
घटना (varanasi) के दौरान यह भी सामने आया कि गेल परिसर में आग बुझाने के लिए कोई स्थायी हाइड्रेंट सिस्टम उपलब्ध नहीं था। ऐसे में पास स्थित बीडी वेंचर ग्रुप के हाइड्रेंट का उपयोग कर आग को फैलने से रोकने में मदद मिली। उद्योगपतियों राजेश अग्रवाल और कौस्तुभ अग्रवाल ने बताया कि उनके तीन लाख लीटर क्षमता वाले हाइड्रेंट को तत्काल चालू कर दिया गया, जिससे आग एग्रो पार्क की अन्य फैक्ट्रियों तक नहीं पहुंच सकी।
करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद देर रात लगभग दो बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग (varanasi) आग लगने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच कर रहे हैं। शुरुआती जांच में गैस लीकेज और शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

