भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज और अदम्य जिजीविषा से अलग पहचान बनाने वाली ‘काशी की लता’ के नाम से प्रसिद्ध वरिष्ठ शास्त्रीय गायिका Mangala Kapoor को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके दशकों लंबे संगीत साधना, संघर्ष और समाज के प्रति योगदान का प्रतीक माना जा रहा है। सम्मान मिलने के बाद भावुक हुईं Mangala Kapoor ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने कठिन दौर में उनका साथ दिया।
उन्होंने कहा, “मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती। मेरे जैसी महिला के लिए पद्मश्री तक का सफर कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। संगीत ने मुझे हर मुश्किल से लड़ने की ताकत दी और आज उसी ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।”
12 साल की उम्र में एसिड अटैक ने बदल दी पूरी जिंदगी
Mangala Kapoor का जीवन साहस, धैर्य और संघर्ष की मिसाल है। महज 12 वर्ष की उम्र में उन पर तेजाब से हमला कर दिया गया था। बाद की जांच में सामने आया कि यह हमला पारिवारिक व्यावसायिक रंजिश के चलते घर के एक नौकर के माध्यम से कराया गया था।
इस दर्दनाक घटना में उनका चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलस गया। अगले छह वर्षों तक उनका लगातार इलाज चलता रहा। यह दौर केवल शारीरिक पीड़ा का नहीं, बल्कि मानसिक संघर्ष और सामाजिक उपेक्षा का भी था। आज भी उस घटना को याद करते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं। Mangala Kapoor कहती हैं, “जब भी उस दिन को याद करती हूं तो आंखों में आंसू आ जाते हैं और पूरा शरीर सिहर उठता है।”
समाज के तानों ने तोड़ा हौसला, स्कूल भी छोड़ना पड़ा
एसिड अटैक के बाद उन्हें केवल दर्द ही नहीं, बल्कि लोगों की संवेदनहीनता का भी सामना करना पड़ा। लगातार सर्जरी के बाद जब उनका चेहरा कुछ सामान्य हुआ तो पिता ने उन्हें दोबारा स्कूल भेजा, लेकिन आठवीं कक्षा में सहपाठियों के तानों और उपहास ने उन्हें गहरे मानसिक आघात में पहुंचा दिया।
Mangala Kapoor ने बताया कि उस दिन उनका नर्वस ब्रेकडाउन हो गया और वह वहीं बेहोश होकर गिर पड़ीं। इसके बाद उन्होंने कभी स्कूल जाने की हिम्मत नहीं जुटाई। बाद में उन्होंने घर पर रहकर बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की।
इस कठिन समय में उनके पिता ने उनका सबसे बड़ा सहारा बनकर उन्हें लगातार यह विश्वास दिलाया कि इस हादसे में उनकी कोई गलती नहीं थी और उन्हें जीवन से हार नहीं माननी चाहिए।
37 सर्जरी के बाद संगीत बना जीवन की नई ताकत
Mangala Kapoor के शरीर की अब तक 37 सर्जरी हो चुकी हैं। वर्षों तक इलाज और मानसिक संघर्ष झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने संगीत को अपना जीवन बना लिया और उसी में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और जीने का उद्देश्य खोज लिया। उनका कहना है कि संगीत ही उनकी “संजीवनी” है, जिसने उन्हें टूटने नहीं दिया और हर कठिन दौर से बाहर निकलने की शक्ति दी।
मंदिर में भजन से मिली पहचान, फिर देशभर में गूंजा नाम
कॉलेज के दिनों में एक मंदिर में भजन गाते समय पहली बार लोगों ने उनकी विलक्षण गायन प्रतिभा को पहचाना। उनकी मधुर आवाज ने श्रोताओं को इतना प्रभावित किया कि धीरे-धीरे उन्हें विभिन्न सांस्कृतिक और संगीत समारोहों में प्रस्तुति देने के निमंत्रण मिलने लगे।
समय के साथ उनकी पहचान उनके चेहरे से नहीं, बल्कि उनकी आवाज से बनने लगी। उन्होंने देशभर के प्रतिष्ठित मंचों पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां दीं और संगीत जगत में अपना विशिष्ट स्थान बनाया।
तीन दशक तक बीएचयू में तैयार किए संगीत के नए सितारे
ग्वालियर घराने की प्रतिष्ठित गायिका Mangala Kapoor ने 1989 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अध्यापन कार्य शुरू किया। लगभग 30 वर्षों तक उन्होंने शास्त्रीय संगीत के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया और अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों को तैयार किया।
संगीत शिक्षण के साथ-साथ उन्होंने देशभर में अपनी प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसके अलावा वह दिव्यांगजनों के कल्याण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।

