Varanasi में गूंजेगा ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष, 16 जुलाई से शुरू होगा ऐतिहासिक रथयात्रा महोत्सव, 30 जून से अनवसर लीला

धर्म, आस्था और परंपरा की नगरी Varanasi एक बार फिर भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु के भव्य रथयात्रा महोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। असि स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में इस वर्ष भी सनातन परंपराओं के अनुरूप स्नान यात्रा, अनवसर लीला, नवयौवन दर्शन, डोली यात्रा और तीन दिवसीय ऐतिहासिक रथयात्रा मेले का आयोजन होगा। इस दिव्य आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

Varanasi का श्री जगन्नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे श्रीक्षेत्र पुरी धाम का प्रतीकात्मक स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन करने से भक्तों को पुरी धाम के दर्शन के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

इतिहास के अनुसार वर्ष 1790 में भगवान श्रीजगन्नाथ (Varanasi) के विग्रह की स्थापना काशी में हुई थी। इसके बाद वर्ष 1802 से लगातार यहां ऐतिहासिक रथयात्रा का आयोजन होता आ रहा है। इस गौरवशाली परंपरा का निर्वहन आज भी शापुरी परिवार के वंशज पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ कर रहे हैं।

30 जून से शुरू होगी अनवसर लीला

महोत्सव की शुरुआत भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के पवित्र स्नान एवं जलाभिषेक से होगी। इसके बाद 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान अनवसर काल में रहेंगे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान अस्वस्थ होकर विश्राम करते हैं और भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते। इस दौरान भगवान (Varanasi) के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष आयुर्वेदिक औषधीय काढ़ा तैयार किया जाएगा, जिसे प्रतिदिन प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।

Varanasi: 14 जुलाई को होंगे नवयौवन दर्शन

अनवसर लीला के समापन के बाद 14 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ नवयौवन स्वरूप में पहली बार भक्तों (Varanasi) को दर्शन देंगे। इस दिन भगवान को विशेष रूप से परवल के जूस का भोग अर्पित किया जाएगा। नवयौवन दर्शन का सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

15 जुलाई को निकलेगी भव्य डोली यात्रा

15 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक डोली यात्रा निकाली जाएगी।

कार्यक्रम का समय

  • मंगला आरती – प्रातः 5:15 बजे
  • डोली सज्जा – दोपहर 3:00 बजे
  • डोली यात्रा प्रस्थान – शाम 4:00 बजे

डोली यात्रा असि स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर (Varanasi) से प्रारंभ होकर दुर्गाकुंड, नवाबगंज, राम मंदिर, कश्मीरीगंज, खोजवां, शंकुलधारा, बैजनत्था और कामाख्या मंदिर मार्ग से होते हुए पंडित बेनीराम बाग (रथयात्रा मैदान) पहुंचेगी।

16 से 18 जुलाई तक लगेगा ऐतिहासिक रथयात्रा मेला

16, 17 और 18 जुलाई तक चलने वाले तीन दिवसीय ऐतिहासिक रथयात्रा मेले (Varanasi) में भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

प्रतिदिन का कार्यक्रम

  • प्रातः 5:00 बजे – मंगला आरती एवं दर्शन
  • दोपहर 12:00 बजे – भोग आरती
  • अपराह्न 3:00 बजे – पुनः दर्शन
  • रात्रि 8:00 बजे – शयन आरती
  • रात्रि 12:00 बजे – विशेष आरती

18 जुलाई की मध्यरात्रि महाआरती के साथ तीन दिवसीय मेले का समापन होगा।

19 जुलाई को निकलेगी बहुड़ा यात्रा

19 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ की पारंपरिक बहुड़ा यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही भगवान पुनः असि स्थित अपने मंदिर (Varanasi) में विराजमान होंगे। 20 जुलाई से मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना एवं दर्शन की व्यवस्था पूर्ववत शुरू हो जाएगी।

ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी, असि, वाराणसी (Varanasi) के अध्यक्ष वृजेश सिंह ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा का जीवंत उत्सव है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस महोत्सव में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने और इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

मंदिर प्रशासन (Varanasi) ने सभी श्रद्धालुओं, धर्मप्रेमियों और काशीवासियों से अधिक से अधिक संख्या में रथयात्रा महोत्सव में शामिल होने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के साथ यह आयोजन काशी की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी अद्भुत प्रतीक है।

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