वाराणसी में इन दिनों मौसम के साथ-साथ हवा की गुणवत्ता भी चिंता का कारण बनी हुई है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खराब श्रेणी में बना हुआ है, जिसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। साल 2026 की शुरुआत से ही AQI 100 के नीचे नहीं आ सका है, जिससे साफ है कि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास अभी प्रभावी नहीं हो पाए हैं।
शनिवार को वाराणसी का औसत AQI 156 रिकॉर्ड किया गया, जो “मध्यम से खराब” श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर की हवा में सांस लेना शरीर के लिए उतना ही नुकसानदेह हो सकता है जितना दिन में कई सिगरेट पीना। खासतौर पर दमा, एलर्जी और फेफड़ों के मरीजों के लिए यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
भेलूपुर बना प्रदूषण का हॉटस्पॉट
शहर में लगे मॉनिटरिंग केंद्रों के आंकड़ों के मुताबिक भेलूपुर क्षेत्र की हवा सबसे अधिक खराब पाई गई है। यहां बढ़ती धूल, भारी ट्रैफिक, वाहनों का धुआं और लगातार चल रहे निर्माण कार्य प्रदूषण के प्रमुख कारण बन रहे हैं।
एक सप्ताह में ऐसा रहा AQI का उतार-चढ़ाव
बीते एक हफ्ते के आंकड़े शहर में प्रदूषण की गंभीरता को साफ दर्शाते हैं:
- 22 मार्च: 131 (सप्ताह का सबसे कम)
- 27 मार्च: 186 (सप्ताह का सबसे अधिक)
- वर्तमान स्तर: 156
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि AQI में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है, लेकिन कुल मिलाकर हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा गहरा असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते वाहनों की संख्या, सड़क की धूल, कूड़ा जलाना, निर्माण कार्य और ट्रैफिक जाम जैसे कारण हवा को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यदि AQI लंबे समय तक 150 से ऊपर रहता है, तो सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिलता है।
खराब हवा से बचने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी उपाय सुझाए हैं:
- सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव
- निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण
- सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग
- कूड़ा जलाने पर सख्त रोक
- शहर में हरित क्षेत्र (पेड़-पौधे) बढ़ाना

