Varanasi: हनुमान जयंती के पावन अवसर पर भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। धर्म और संस्कृति की नगरी में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, खासकर संकट मोचन मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।
मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने इस अवसर पर सभी भक्तों को शुभकामनाएं दीं और मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि हनुमान जयंती के दिन मंदिर में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसके तहत भगवान हनुमान की ‘बैठी हुई झांकी’ सजाई जाती है। सामान्य दिनों में जहां हनुमान जी खड़े रूप में विराजमान रहते हैं, वहीं उनके जन्मोत्सव पर उन्हें विश्राम मुद्रा में बैठाकर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी (Varanasi) पहुंच रहे हैं। भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुगम दर्शन के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
Varanasi: धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की धूम
हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर परिसर में ध्वजा यात्रा के साथ उत्सव की शुरुआत हुई। शाम के समय मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों से आई मंडलियों द्वारा रामचरितमानस का सामूहिक गान किया गया। पूरे परिसर (Varanasi) में भक्ति का वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। महंत प्रो. मिश्रा ने स्वयं भक्तों को प्रसाद बांटकर आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
ध्वज यात्रा और शोभायात्राओं से गूंजा शहर
शहर (Varanasi) के विभिन्न हिस्सों से भव्य ध्वज यात्राएं और शोभायात्राएं निकाली गईं, जो अलग-अलग मार्गों से होते हुए संकट मोचन मंदिर पहुंचीं। श्रद्धालु केसरिया ध्वज लेकर “जय श्री राम” और “हनुमान जी की जय” के जयघोष के साथ आगे बढ़ते रहे। भजन-कीर्तन, झांकियों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कई थानों की पुलिस फोर्स, पीएसी और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। शिवहरी मीणा (Varanasi) ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों के साथ मिलकर यातायात और भीड़ प्रबंधन को सुचारू बनाए रखा।

