Varanasi में गंगा दशहरा पर उमड़ी आस्था की लहर, घाटों पर देर रात तक गूंजते रहे हर-हर महादेव के जयघोष

Varanasi: गंगा दशहरा के पावन अवसर पर काशी के घाट सोमवार शाम भक्ति, आध्यात्मिकता और सनातन संस्कृति की अलौकिक छटा से जगमगा उठे। ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर आयोजित भव्य गंगा महाआरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार, डमरू निनाद और “हर-हर गंगे” के जयघोष से पूरा घाट क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

दशाश्वमेध घाट पर महारती का आयोजन

गंगा सेवा निधि के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मां गंगा (Varanasi) की अष्टधातु प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। समिति के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा के सानिध्य में 501 लीटर दूध, पुष्प, फल और मिष्ठान्न से मां गंगा का दुग्धाभिषेक एवं षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ। श्रद्धा स्वरूप मां गंगा को पियरी साड़ी भी अर्पित की गई।

महाआरती के दौरान 11 वैदिक ब्राह्मणों ने एक साथ दीप स्तंभों से मां गंगा की आरती उतारी, जबकि 21 कन्याओं ने चंवर डुलाकर मातृशक्ति का आह्वान किया। श्रद्धालुओं ने दीप प्रवाहित कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

केदार घाट पर दीपों से सजा भक्तिमय माहौल

केदार घाट (Varanasi) पर भी गंगा दशहरा उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। गंगोत्री सेवा समिति की ओर से संदीप दुबे ‘सोनू महाराज’ के संयोजन में विशेष गंगा पूजन, दुग्धाभिषेक और महाआरती का आयोजन किया गया।

दीपों और फूलों से सजे घाट पर वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा का पूजन कराया। “ॐ गंगे च यमुने चैव…” और “ॐ नमो भगवति गंगे…” जैसे मंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। महाआरती के दौरान शंखध्वनि, घंटियों और “हर-हर महादेव” के जयघोष से घाट गूंज उठा। इसके बाद आयोजित भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Varanasi: अस्सी घाट पर “माँ गंगा प्राकट्य उत्सव”

अस्सी घाट पर आयोजित “माँ गंगा प्राकट्य उत्सव” भी आकर्षण का केंद्र रहा। ब्रह्मराष्ट्र एकम विश्व महासंघ न्यास और श्रीकुल पीठ के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं (Varanasi) ने हिस्सा लिया। पूरा घाट “जय माँ गंगे” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजता रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, दुग्धाभिषेक और विशेष पूजन से हुई। देशभर से लाई गई 5100 साड़ियों से मां गंगा को भव्य चुनरी अर्पित की गई। वहीं 56 परिवारों ने 56 प्रकार के भोग अर्पित कर आस्था और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की। कार्यक्रम में रंगोली, चित्रकला, शास्त्रीय नृत्य और भजन-गायन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने का प्रयास भी किया गया।

इसी दौरान मंच से घोषणा की गई कि प्रधानमंत्री एवं काशी के सांसद नरेन्द्र मोदी को पहली बार “गंगा भगीरथ विश्वगुरु काशी सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों (Varanasi) ने बताया कि गंगा स्वच्छता, घाटों के विकास और काशी के आध्यात्मिक पुनर्जागरण में योगदान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

कार्यक्रम में “गंगा पुत्र सम्मान”, “गंगा पुत्री सम्मान”, “गंगा भूषण सम्मान” और “गंगा सेवा भूषण सम्मान” सहित कई अलंकरण भी प्रदान किए गए। वहीं कल्कि महाराज को “जगतगुरु” की सम्मानित उपाधि देने की घोषणा होते ही घाट तालियों और जयघोष से गूंज उठा।

पंचगंगा घाट पर प्राचीन परंपरा का आयोजन

पंचगंगा घाट (Varanasi) पर श्रीकाशी गंगोत्सव मंडल की ओर से गंगा दशहरा पर मां गंगा का पारंपरिक पूजन किया गया। संस्था ने 115 वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा को निभाते हुए उत्सव का आयोजन किया।

कार्यक्रम में पार्षद संतोष सोलापुरकर, डॉ. माधव जनार्दन रटाटे, घटना नियंत्रण अधिकारी वासुदेव मंडलीकर, नारायण भागवत समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने मां गंगा का पूजन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

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