Varanasi: आधुनिक भारत में जहां लोग देश-दुनिया की सैर को सामान्य बात मानते हैं, वहीं चंदौली जिले के नौगढ़ विकासखंड का एक छोटा सा आदिवासी गांव आज भी ऐसी जिंदगी जी रहा है, जहां कई लोगों ने कभी अपने गांव की सीमा तक पार नहीं की। शहर की चकाचौंध तो दूर, उन्होंने आज तक किसी बड़े नगर की सूरत भी नहीं देखी थी। लेकिन वर्षों से मन में संजोया एक सपना आखिरकार पूरा हुआ, जब गांव की महिलाओं और पुरुषों ने पहली बार वाराणसी पहुंचकर बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन किए।
चंदौली के नौगढ़ क्षेत्र में पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसे पंडी गांव के करीब 80 परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। गांव की अधिकांश महिलाएं और पुरुष कभी गांव और जंगल की सीमाओं से बाहर नहीं निकले। उनके मन में वर्षों से एक ही इच्छा थी कि जीवन में एक बार काशी विश्वनाथ, संकटमोचन और अन्य प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने का अवसर मिले।
मिशन शक्ति अभियान के तहत हुई पहल
यह सपना तब साकार हुआ जब पुलिस विभाग (Varanasi) के मिशन शक्ति अभियान के तहत गांव की 40 महिलाओं और 10 पुरुषों को विशेष बस से वाराणसी लाया गया। पूरे दिन उन्हें काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए गए। पहली बार शहर की चौड़ी सड़कें, भीड़, रोशनी और भव्य मंदिर देखकर ग्रामीणों के चेहरे पर उत्साह और भावुकता साफ दिखाई दे रही थी।
इस पहल की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई, जब डीआईजी वैभव कृष्ण पंडी गांव पहुंचे थे। ग्रामीण महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्होंने सहज भाव से पूछा कि वे क्या देखना चाहती हैं। महिलाओं का जवाब सुनकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उन्होंने आज तक शहर नहीं देखा और उनकी सबसे बड़ी इच्छा बाबा काशी विश्वनाथ तथा अन्य मंदिरों के दर्शन करने की है।
महिलाओं (Varanasi) की इस मासूम इच्छा ने डीआईजी को भी प्रभावित किया। उन्होंने मौके पर ही चंदौली पुलिस को निर्देश दिया कि मिशन शक्ति अभियान के तहत गांव के लोगों की इस इच्छा को पूरा किया जाए।
Varanasi: पुलिस की विशेष बस पहुंची पंडी गांव
निर्देश के बाद सोमवार सुबह पुलिस की विशेष बस पंडी गांव पहुंची। बस में दुर्गावती देवी, सरस्वती, कलावती, पुष्प, प्रभावती समेत 40 महिलाओं और 10 पुरुषों को वाराणसी लाया गया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए दो इंस्पेक्टर और चार उपनिरीक्षक भी उनके साथ रहे।
चंदौली के पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने बताया कि सभी श्रद्धालुओं ने सबसे पहले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Varanasi) में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद संकटमोचन मंदिर, दुर्गाकुंड मंदिर सहित काशी के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों में उत्साह देखने लायक था।
यात्रा में शामिल महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन बाबा विश्वनाथ (Varanasi) के दरबार तक पहुंच पाएंगी। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे यादगार दिन है और पुलिस विभाग ने उनकी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी कर दी।
दरअसल, पंडी गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी दूर है। पहाड़ों और जंगलों से घिरे इस गांव में लगभग 80 परिवार रहते हैं। गर्मियों में प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाने से पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है और लोगों को कई किलोमीटर दूर (Varanasi) से पानी लाना पड़ता है।
गांव (Varanasi) में मोबाइल नेटवर्क भी लगभग नहीं के बराबर है, जिसके कारण यहां के लोग बाहरी दुनिया से लगभग कटे हुए हैं। अधिकांश परिवार जंगल से मिलने वाले संसाधनों और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। सीमित आय के कारण दो वक्त की रोटी और जरूरी जरूरतें पूरी करना भी कई परिवारों के लिए चुनौती बना रहता है।

