Varanasi: साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक” के तहत वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। संयुक्त अभियान में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 4 म्यूल अकाउंट धारक और 2 सक्रिय साइबर अपराधी शामिल हैं। जांच के दौरान सामने आया कि इन खातों के माध्यम से देशभर में 2 करोड़ 42 लाख 89 हजार 752 रुपये की साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया गया था।
यह कार्रवाई (Varanasi) पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन, अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) आलोक प्रियदर्शी के पर्यवेक्षण तथा पुलिस उपायुक्त (अपराध) नीतू कादयान के नेतृत्व में की गई। साइबर सेल के साथ थाना सिगरा, भेलूपुर, चेतगंज और चोलापुर पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले का खुलासा शनिवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में डीसीपी अपराध नीतू कादयान और एसीपी साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने किया।
कमीशन के लालच में सौंपे बैंक खाते
डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि गिरफ्तार म्यूल अकाउंट धारकों ने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी साइबर अपराधियों को कमीशन के बदले उपलब्ध कराई थी। इसके बाद ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर कर उसे आगे विभिन्न खातों में भेजा जाता था, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके और जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।
फर्जी निवेश से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक बनाते थे शिकार
पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य लोगों (Varanasi) को फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन जॉब, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, लोन और अन्य साइबर फ्रॉड के जरिए अपने जाल में फंसाते थे। ठगी से हासिल रकम सीधे अपने खातों में रखने के बजाय म्यूल अकाउंट के जरिए इधर-उधर भेजी जाती थी, जिससे अपराधियों की पहचान छिपी रहे।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने साइबर ठगी (Varanasi) में इस्तेमाल किए जा रहे 6 बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी न दें और आसान कमाई या कमीशन के लालच में अपने खाते का इस्तेमाल किसी अन्य को न करने दें।
Varanasi: क्या होता है म्यूल अकाउंट?
पुलिस के अनुसार, म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसे उसका धारक कमीशन या आर्थिक लाभ (Varanasi) के लालच में साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए उपलब्ध करा देता है। अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने, उसकी असली पहचान छिपाने और जांच को भटकाने के लिए करते हैं।

