वाराणसी: UP Board की परीक्षाएं खत्म, अब 18 मार्च से जांची जाएंगी कॉपियां, नंबरों में दिखा अंतर तो होगा क्रास चेक

वाराणसी: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की हाईस्कूल (कक्षा 10) और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) की परीक्षाएं 12 मार्च को सफलतापूर्वक समाप्त हो गई हैं। अब बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। वाराणसी जिले में चार मूल्यांकन केंद्रों पर 18 मार्च से कॉपियों की जांच शुरू हो जाएगी। वहीं बोर्ड इस बार मूल्यांकन को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और निष्पक्ष बनाने पर जोर दे रहा है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने परीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं ताकि कोई गड़बड़ी न हो।

पहली बार लागू होगा नया सिस्टम

इस साल यूपी बोर्ड ने मूल्यांकन में एक महत्वपूर्ण नई व्यवस्था लागू की है। अगर किसी छात्र को एक विषय में अन्य विषयों की तुलना में बहुत कम या बहुत ज्यादा अंक आते हैं, तो उसकी उत्तर पुस्तिका को अलग निकाल लिया जाएगा। फिर विशेषज्ञों की टीम द्वारा उस कॉपी का क्रॉस-चेक किया जाएगा। इससे अंकों में किसी तरह की त्रुटि या पक्षपात की आशंका को खत्म करने का प्रयास है।

मूल्यांकन के बाद 15% कॉपियों का ऑडिट

बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन पूरा होने के बाद प्रदेश भर में 15 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं का रैंडम ऑडिट कराया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार पहली बार ऑनलाइन ऑडिटर नियुक्त किए गए हैं, जो पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाएंगे।

प्रदेश में कुल करीब 1.31 लाख परीक्षक तैनात किए गए हैं। पूरे यूपी में 250 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं, जबकि वाराणसी में चार केंद्रों पर यह काम होगा।

मेरिट लिस्ट में बदलाव की संभावना कम

पिछले कुछ सालों में मूल्यांकन में हुई छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण मेरिट सूची में बदलाव करना पड़ता था, जिससे कई छात्रों को नुकसान होता था। इस समस्या को दूर करने के लिए इस बार हर केंद्र पर मूल्यांकित कॉपियों में से 15 प्रतिशत का रैंडम ऑडिट अनिवार्य है।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी छात्र के ज्यादातर विषयों में 90% या उससे ज्यादा अंक हैं, लेकिन एक विषय में सिर्फ 40-45% अंक आए हैं, तो उस कॉपी की अलग से जांच होगी। इसी तरह, अगर ज्यादातर विषयों में कम अंक हैं और एक विषय में 90% से ज्यादा, तो भी क्रॉस-चेकिंग होगी।

बोर्ड का साफ मकसद है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी बनी रहे, छात्रों को उनका हक मिले और मेरिट लिस्ट में किसी तरह की गड़बड़ी या बाद में बदलाव की कोई गुंजाइश न रहे।

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